भारत सरकार ने Semicon 2.0 योजना को अधिसूचित कर दिया है। यह Semicon India Programme का अगला चरण है, जिसका उद्देश्य भारत में सेमीकंडक्टर उद्योग को और मजबूत करना है। इस योजना के लिए 1,27,500 करोड़ रुपये का वित्तीय प्रावधान किया गया है।
Semicon 2.0 के तहत सेमीकंडक्टर निर्माण के साथ-साथ चिप डिजाइन, पैकेजिंग, अनुसंधान एवं विकास और कौशल विकास पर भी जोर दिया जाएगा। इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, रक्षा और दूरसंचार जैसे क्षेत्रों में सेमीकंडक्टर की बढ़ती मांग को देखते हुए सरकार की यह पहल भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
Semicon 2.0 योजना क्या है?
Semicon 2.0 को भारत में सेमीकंडक्टर की पूरी वैल्यू चेन विकसित करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसका फोकस केवल चिप बनाने वाली फैक्ट्रियां स्थापित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि डिजाइन से लेकर निर्माण, टेस्टिंग, पैकेजिंग और कुशल मानव संसाधन तैयार करने तक है।
योजना को छह प्रमुख स्तंभों पर आधारित किया गया है—
- सेमीकंडक्टर डिजाइन
- मशीनरी और सामग्री
- फैब्रिकेशन यूनिट्स
- ATMP और OSAT सुविधाएं
- अनुसंधान एवं विकास (R&D)
- प्रतिभा एवं कौशल विकास
यह मॉडल भारत में एक मजबूत और आत्मनिर्भर सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम तैयार करने पर केंद्रित है।
फैब यूनिट्स को मिलेगी बड़ी वित्तीय सहायता
Semicon 2.0 के तहत बड़े निवेश वाली सेमीकंडक्टर फैब यूनिट्स को सरकार की ओर से वित्तीय सहायता दी जाएगी।
कम से कम 20,000 करोड़ रुपये के निवेश वाली सिलिकॉन वेफर फैब यूनिट्स को परियोजना लागत का 40 प्रतिशत तक वित्तीय समर्थन देने का प्रावधान है।
वहीं, कंपाउंड सेमीकंडक्टर, डिस्प्ले और अन्य विशेषीकृत फैब यूनिट्स के लिए 35 प्रतिशत तक वित्तीय सहायता का प्रावधान किया गया है।
सरकार का उद्देश्य इस सहायता के माध्यम से भारत में बड़े पैमाने पर सेमीकंडक्टर निर्माण क्षमता विकसित करना और वैश्विक कंपनियों को भारत में निवेश के लिए आकर्षित करना है।
चिप डिजाइन और स्टार्टअप्स पर भी फोकस
Semicon 2.0 में भारत के चिप डिजाइन इकोसिस्टम को मजबूत करने पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। योजना के तहत स्टार्टअप्स तथा भारतीय या OCI स्वामित्व वाली कंपनियां चिप डिजाइन से जुड़े प्रोत्साहनों के लिए आवेदन कर सकती हैं।
डिप्लॉयमेंट-लिंक्ड इंसेंटिव के तहत नेट बिक्री का 9 प्रतिशत तक प्रोत्साहन दिए जाने का प्रावधान है। यह प्रोत्साहन अधिकतम पांच वर्षों तक उपलब्ध होगा और प्रति आवेदन इसकी अधिकतम सीमा 30 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है।
इससे भारत में चिप डिजाइन से जुड़े स्टार्टअप्स और कंपनियों को अपने उत्पाद विकसित करने तथा वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
1 लाख अतिरिक्त सेमीकंडक्टर इंजीनियरों को प्रशिक्षण
सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए कुशल मानव संसाधन तैयार करना भी Semicon 2.0 का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
सरकार ने 1 लाख अतिरिक्त सेमीकंडक्टर इंजीनियरों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा है। इससे पहले करीब 85,000 इंजीनियरों को प्रशिक्षण दिए जाने की जानकारी दी गई है।
इसका उद्देश्य भारत में तेजी से विकसित हो रहे सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए आवश्यक तकनीकी विशेषज्ञ और कुशल कार्यबल तैयार करना है।
रणनीतिक चिप्स की पहचान के लिए बनेगा विशेषज्ञ पैनल
सरकार राष्ट्रीय हित से जुड़े रणनीतिक सेमीकंडक्टर चिप्स की पहचान करने के लिए एक उच्चस्तरीय विशेषज्ञ पैनल भी बनाएगी।
यह पैनल रणनीतिक महत्व वाले चिप्स की पहचान करेगा और उनके विकास के लिए लक्षित प्रोत्साहनों को लेकर सुझाव देगा। पैनल की सह-अध्यक्षता प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार करेंगे।
यह कदम खासतौर पर रक्षा, दूरसंचार और अन्य रणनीतिक क्षेत्रों में भारत की सेमीकंडक्टर जरूरतों को सुरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण हो सकता है।
₹4 लाख करोड़ निवेश और ₹2 लाख करोड़ उत्पादन का अनुमान
सरकार को उम्मीद है कि Semicon 2.0 के माध्यम से देश में करीब 4 लाख करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित किया जा सकता है और लगभग 2 लाख करोड़ रुपये का उत्पादन हासिल किया जा सकता है।
वहीं, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स एंड सेमीकंडक्टर एसोसिएशन के अनुमान के अनुसार, यह कार्यक्रम 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निजी और उद्योग निवेश को भी गति दे सकता है।
यदि ये निवेश और उत्पादन लक्ष्य हासिल होते हैं, तो भारत वैश्विक सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन में अपनी भूमिका को और मजबूत कर सकता है।
Semicon 2.0 भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
आज स्मार्टफोन, कंप्यूटर, इलेक्ट्रिक वाहन, रक्षा उपकरण, टेलीकॉम नेटवर्क और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे लगभग सभी आधुनिक तकनीकी क्षेत्रों में सेमीकंडक्टर की महत्वपूर्ण भूमिका है।
वैश्विक स्तर पर चिप सप्लाई चेन में बदलाव और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा के बीच भारत के लिए घरेलू सेमीकंडक्टर क्षमता विकसित करना महत्वपूर्ण हो गया है।
Semicon 2.0 के जरिए सरकार भारत को केवल सेमीकंडक्टर का बड़ा उपभोक्ता बनाने के बजाय चिप डिजाइन और निर्माण का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।


