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एयर मार्शल केएए संजीब ने संभाला भारतीय वायुसेना में एयर ऑफिसर-इन-चार्ज मेंटेनेंस का पदभार

On: September 2, 2026
Indian Air Force senior Air Marshal officer

भारतीय वायुसेना में एयर मार्शल केएए संजीब, एवीएसएम, वीएसएम ने 1 सितंबर 2026 को एयर ऑफिसर-इन-चार्ज मेंटेनेंस (AOM) का महत्वपूर्ण पदभार संभाल लिया। उन्होंने एयर मार्शल संजीव घुरतिया का स्थान लिया, जो 31 अगस्त 2026 को लगभग 39 वर्षों की विशिष्ट सैन्य सेवा के बाद सेवानिवृत्त हुए।

एयर ऑफिसर-इन-चार्ज मेंटेनेंस का पद भारतीय वायुसेना की परिचालन क्षमता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस पद पर तैनात अधिकारी विमान रखरखाव, इंजीनियरिंग सहायता, तकनीकी प्रणालियों के प्रबंधन और वायुसेना के प्रमुख ऑपरेशनल एसेट्स की मेंटेनेंस योजना से जुड़ी जिम्मेदारियों का नेतृत्व करते हैं।

वायुसेना की तकनीकी और रखरखाव व्यवस्था की अहम जिम्मेदारी

एयर ऑफिसर-इन-चार्ज मेंटेनेंस भारतीय वायुसेना मुख्यालय की एक वरिष्ठ नियुक्ति है। इस पद की भूमिका केवल विमानों और उपकरणों की तकनीकी जांच तक सीमित नहीं होती, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी होता है कि वायुसेना के विमान और अन्य महत्वपूर्ण प्रणालियां जरूरत पड़ने पर मिशन के लिए पूरी तरह तैयार रहें।

आधुनिक युद्ध और हवाई अभियानों में तकनीकी तत्परता की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। किसी भी सैन्य अभियान की सफलता केवल पायलटों और विमानों पर निर्भर नहीं करती, बल्कि उसके पीछे मजबूत इंजीनियरिंग, समय पर रखरखाव, स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता और सिस्टम सपोर्ट भी उतना ही जरूरी होता है।

भारतीय वायुसेना जैसे विशाल और विविध विमान बेड़े वाली सैन्य सेवा में यह जिम्मेदारी रणनीतिक महत्व रखती है। आधुनिक विमानन तकनीक, स्पेयर सप्लाई, सिस्टम अपग्रेड और दीर्घकालिक मेंटेनेंस प्लानिंग के बीच प्रभावी समन्वय बनाए रखना इस पद की प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल है।

एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग से वायुसेना की शीर्ष जिम्मेदारी तक

एयर मार्शल केएए संजीब को 3 सितंबर 1988 को भारतीय वायुसेना की एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग की मैकेनिकल शाखा में कमीशन प्रदान किया गया था।

अपने लंबे सैन्य करियर के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण तकनीकी और प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभाली हैं। इससे पहले वे डायरेक्टर जनरल (एयरक्राफ्ट), डायरेक्टर जनरल (सिस्टम) और एयर मुख्यालय में असिस्टेंट चीफ ऑफ द एयर स्टाफ (मेंटेनेंस प्लान्स) जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं।

वर्ष 2003 में एयर मार्शल केएए संजीब ने एयर मुख्यालय की प्रोजेक्ट मैनेजमेंट टीम में लीड इंजीनियर और टीम लीडर के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इस दौरान भारतीय वायुसेना में पहले IL-78 फ्लाइट रिफ्यूलर विमान को शामिल करने की प्रक्रिया में उनका अहम योगदान रहा।

IL-78 विमान भारतीय वायुसेना की लंबी दूरी तक अभियान चलाने की क्षमता के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह अन्य सैन्य विमानों को हवा में ही ईंधन उपलब्ध कराने में सक्षम है।

विशिष्ट सेवा के लिए मिले सैन्य सम्मान

एयर मार्शल केएए संजीब को उनकी विशिष्ट सैन्य सेवाओं के लिए कई सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है। उन्हें वर्ष 2015 में विशिष्ट सेवा पदक (VSM) और वर्ष 2026 में अति विशिष्ट सेवा पदक (AVSM) प्रदान किया गया।

ये सम्मान भारतीय सशस्त्र बलों में अधिकारियों द्वारा दी गई विशिष्ट और उत्कृष्ट सेवाओं की मान्यता के रूप में दिए जाते हैं।

नई जिम्मेदारी संभालने के बाद एयर मार्शल संजीब ने नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर जाकर देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले सैनिकों को श्रद्धांजलि दी और पुष्पचक्र अर्पित किया।

राष्ट्रीय युद्ध स्मारक उन वीर सैनिकों की स्मृति को समर्पित है जिन्होंने देश की रक्षा और कर्तव्य पालन के दौरान अपने प्राण न्योछावर कर दिए।

खबर से जुड़े महत्वपूर्ण जीके तथ्य

  • भारतीय वायुसेना की स्थापना 8 अक्टूबर 1932 को हुई थी।
  • एयर ऑफिसर-इन-चार्ज मेंटेनेंस वायुसेना की तकनीकी और रखरखाव व्यवस्था से जुड़ी एक वरिष्ठ नियुक्ति है।
  • एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग शाखा विमान, इंजन और संबंधित तकनीकी प्रणालियों के रखरखाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
  • IL-78 एक एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग विमान है, जिसका उपयोग हवा में अन्य विमानों को ईंधन उपलब्ध कराने के लिए किया जाता है।
  • विशिष्ट सेवा पदक (VSM) और अति विशिष्ट सेवा पदक (AVSM) भारतीय सशस्त्र बलों के महत्वपूर्ण सैन्य सम्मानों में शामिल हैं।
  • राष्ट्रीय युद्ध स्मारक नई दिल्ली में स्थित है और देश के लिए बलिदान देने वाले सैनिकों की स्मृति को समर्पित है।

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