मुख्य बिंदु
- अवसर: National Wildlife Day 2026 के अवसर पर भागलपुर की जैव विविधता से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई।
- स्थान: भागलपुर, बिहार।
- विशेष उपलब्धि: बिहार में पहली बार किसी शहरी क्षेत्र का वैज्ञानिक तरीके से Bird Atlas (बर्ड एटलस) तैयार किया जा रहा है।
- सर्वे की स्थिति: पक्षी सर्वेक्षण का कार्य अंतिम चरण में पहुंच चुका है।
- कुल दर्ज प्रजातियां: अब तक 105 पक्षी प्रजातियों की पुष्टि की गई है।
- विशेष तथ्य: सर्वे में कुछ ऐसी प्रजातियां भी शामिल हैं जो IUCN Red List में दर्ज हैं।
- सर्वे क्षेत्र:
- सबौर
- गंगा तटीय क्षेत्र
- नाथनगर
- चंपानगर
- आसपास के दियारा एवं आर्द्रभूमि क्षेत्र
- सर्वे अवधि: लगभग तीन वर्षों से पक्षियों का वैज्ञानिक अध्ययन किया जा रहा है।
- सहयोगी संस्था: Bombay Natural History Society (BNHS)।
- राज्य विभाग: वन प्रमंडल, भागलपुर।
सर्वे का उद्देश्य
इस अध्ययन का उद्देश्य केवल पक्षियों की संख्या गिनना नहीं है, बल्कि निम्नलिखित पहलुओं का अध्ययन करना है—
- पक्षियों के प्राकृतिक आवास (Habitat)
- भोजन श्रृंखला
- प्रजनन चक्र
- मौसमी प्रवास (Migration)
- स्थानीय पर्यावरण के प्रति अनुकूलन क्षमता
भागलपुर क्यों महत्वपूर्ण है?
भागलपुर में गंगा नदी के तटीय क्षेत्र, दियारा भूमि, आर्द्रभूमियां (Wetlands) और प्राकृतिक हरियाली पक्षियों के लिए अनुकूल पारिस्थितिक तंत्र उपलब्ध कराते हैं।
विशेष रूप से शीतकाल में प्रवासी पक्षियों के लिए यह क्षेत्र महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
Bird Atlas का महत्व
बर्ड एटलस तैयार होने के बाद—
- पक्षियों की विभिन्न प्रजातियों का वैज्ञानिक रिकॉर्ड तैयार होगा।
- उनके विशिष्ट आवासों की पहचान की जाएगी।
- GIS आधारित डिजिटल मैपिंग की जा सकेगी।
- संवेदनशील गंगा कछार और आर्द्रभूमि क्षेत्रों की पहचान होगी।
- पक्षी संरक्षण के लिए वैज्ञानिक रणनीति तैयार करने में सहायता मिलेगी।
परीक्षा के लिए एक लाइन में
बिहार में पहली बार भागलपुर शहर का Bird Atlas तैयार किया जा रहा है, जिसमें अब तक 105 पक्षी प्रजातियों की पहचान की गई है।
महत्वपूर्ण संस्थान
BNHS का पूरा नाम: Bombay Natural History Society
IUCN का पूरा नाम: International Union for Conservation of Nature
