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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: 7 राज्यों में न्यायिक अधिकारियों की रिटायरमेंट उम्र 60 से बढ़ाकर 62 साल

On: September 4, 2026

सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक अधिकारियों की रिटायरमेंट उम्र को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए सात राज्यों को इसे 60 वर्ष से बढ़ाकर 62 वर्ष करने का निर्देश दिया है। यह फैसला जिला न्यायपालिका में अनुभवी न्यायिक अधिकारियों की उपलब्धता बनाए रखने और रिक्त पदों की समस्या को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने इस संबंध में निर्देश जारी किए।

किन 7 राज्यों में बढ़ेगी रिटायरमेंट की उम्र?

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार निम्नलिखित सात राज्यों को अपने सेवा नियमों में संशोधन कर न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु 60 वर्ष से बढ़ाकर 62 वर्ष करनी होगी—

  1. छत्तीसगढ़
  2. कर्नाटक
  3. मध्य प्रदेश
  4. महाराष्ट्र
  5. सिक्किम
  6. तमिलनाडु
  7. पश्चिम बंगाल

इन राज्यों ने न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की थी।

60 वर्ष की उम्र के बाद होगी Suitability और Performance Assessment

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि 60 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद प्रत्येक न्यायिक अधिकारी को स्वतः 62 वर्ष तक सेवा जारी रखने का अधिकार नहीं होगा।

संबंधित हाई कोर्ट द्वारा अधिकारी की Suitability और Performance का Assessment किया जाएगा। इस मूल्यांकन के आधार पर ही अधिकारी को 62 वर्ष की आयु तक सेवा जारी रखने की अनुमति दी जाएगी।

नियमों में औपचारिक संशोधन होने तक भी इन सात राज्यों में योग्य न्यायिक अधिकारियों को 62 वर्ष तक सेवा जारी रखने का अवसर दिया जा सकता है।

31 मार्च 2026 या उसके बाद रिटायर हुए अधिकारियों को भी मिलेगा अवसर

सुप्रीम कोर्ट ने उन न्यायिक अधिकारियों के लिए भी विशेष व्यवस्था की है जो 31 मार्च 2026 या उसके बाद सेवानिवृत्त हुए हैं।

इन सात राज्यों के ऐसे अधिकारी न्यायिक सेवा में दोबारा शामिल होने का विकल्प प्राप्त कर सकते हैं, बशर्ते उन्होंने सेवानिवृत्ति के बाद कोई अन्य ऐसी नौकरी स्वीकार नहीं की हो जो उन्हें इस लाभ के लिए अयोग्य बनाती हो।

यह व्यवस्था उन अधिकारियों को अनुभवी न्यायिक प्रतिभा के रूप में दोबारा न्यायपालिका से जोड़ने के उद्देश्य से की गई है।

अन्य राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को फैसले पर पुनर्विचार का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने अन्य राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को भी न्यायिक अधिकारियों की रिटायरमेंट उम्र बढ़ाने के मुद्दे पर पुनर्विचार करने को कहा है।

इनमें शामिल हैं—

  • आंध्र प्रदेश
  • अरुणाचल प्रदेश
  • असम
  • बिहार
  • गोवा
  • गुजरात
  • हरियाणा
  • हिमाचल प्रदेश
  • झारखंड
  • केरल
  • मणिपुर
  • मेघालय
  • मिजोरम
  • नागालैंड
  • ओडिशा
  • पंजाब
  • राजस्थान
  • तेलंगाना
  • त्रिपुरा
  • उत्तराखंड
  • उत्तर प्रदेश
  • राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली
  • जम्मू-कश्मीर
  • पुडुचेरी

इन राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को इस मुद्दे पर निर्णय लेकर दो सप्ताह के भीतर Compliance Report प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई 1 अक्टूबर 2026 को निर्धारित की गई है।

सुप्रीम कोर्ट ने क्यों जरूरी माना रिटायरमेंट उम्र बढ़ाना?

सुप्रीम कोर्ट ने न्यायपालिका में अनुभवी अधिकारियों के समय से पहले बाहर होने और जिला न्यायपालिका में स्वीकृत तथा कार्यरत पदों के बीच मौजूद अंतर को महत्वपूर्ण मुद्दा बताया।

कोर्ट ने माना कि न्यायिक सेवा में अनुभवी प्रतिभा को बनाए रखना आवश्यक है, ताकि बड़ी संख्या में रिक्त पदों के कारण न्याय तक लोगों की पहुंच प्रभावित न हो।

न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु में पिछली बड़ी वृद्धि 1992 में की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी ध्यान दिलाया कि इसके बाद तीन दशक से अधिक समय बीत चुका है और इस दौरान न्यायिक व्यवस्था में स्वीकृत पदों की संख्या बढ़ने के साथ-साथ रिक्तियों की समस्या भी बनी रही।

परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण बिंदु

  • न्यायिक अधिकारियों की रिटायरमेंट उम्र बढ़ाने का निर्देश देने वाला संस्थान — सुप्रीम कोर्ट
  • नई रिटायरमेंट उम्र — 62 वर्ष
  • पहले की रिटायरमेंट उम्र — 60 वर्ष
  • निर्देशित राज्यों की संख्या — 7
  • फैसला सुनाने वाली पीठ — 3 सदस्यीय पीठ
  • पीठ की अध्यक्षता — मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत
  • अन्य दो न्यायाधीश — जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना
  • विशेष लाभ की संदर्भ तिथि — 31 मार्च 2026 या उसके बाद
  • अन्य राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों को निर्णय के लिए समय — 2 सप्ताह
  • अगली सुनवाई — 1 अक्टूबर 2026

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