भारत की रक्षा और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और हैदराबाद विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं को नई पीढ़ी के ठोस रॉकेट प्रोपेलेंट से जुड़ी तकनीक के लिए भारतीय पेटेंट मिला है।
भारतीय पेटेंट कार्यालय ने 2 सितंबर 2026 को यह पेटेंट जारी किया। पेटेंट DRDO के अध्यक्ष और यूनिवर्सिटी ऑफ हैदराबाद के एडवांस्ड सेंटर ऑफ रिसर्च इन हाई एनर्जी मटेरियल्स (ACRHEM) के नाम दर्ज किया गया है। यह आविष्कार BAM-H24 नामक एक ऊर्जा-समृद्ध ठोस रॉकेट प्रोपेलेंट सामग्री से संबंधित है, जिसे भविष्य की रक्षा और प्रक्षेपण प्रणालियों के लिए उपयोगी माना जा रहा है।
क्या है BAM-H24?
BAM-H24 एक ऊर्जा-समृद्ध रासायनिक यौगिक है, जिसमें बोरॉन, हाइड्रोजन और नाइट्रोजन जैसे महत्वपूर्ण तत्व शामिल हैं। इसे ठोस रॉकेट ईंधन, प्रोपेलेंट एडिटिव और बर्न-रेट एक्सेलेरेटर के रूप में उपयोग करने की संभावना को ध्यान में रखते हुए विकसित किया गया है।
इस यौगिक की रासायनिक पहचान N1,N1,N1,N4,N4,N4-hexaethylbut-2-yne-1,4-diaminiumdodecaborane के रूप में बताई गई है।
शोधकर्ताओं के अनुसार BAM-H24 में कई महत्वपूर्ण गुण मौजूद हैं, जो इसे उच्च-ऊर्जा सामग्री के क्षेत्र में विशेष बनाते हैं।
BAM-H24 की प्रमुख विशेषताएं
- रासायनिक और तापीय रूप से स्थिर
- झटके और घर्षण के प्रति अपेक्षाकृत उच्च असंवेदनशीलता
- ऊर्जा-आधारित अनुप्रयोगों के लिए बेहतर सुरक्षा गुण
- नॉन-हाइग्रोस्कोपिक, यानी नमी को आसानी से अवशोषित नहीं करता
- लंबे समय तक भंडारण और परिवहन के लिए उपयोगी
- उच्च विशिष्ट आवेग की क्षमता
- कम ignition delay time
नमी को कम अवशोषित करने की विशेषता इस सामग्री को विशेष रूप से उपयोगी बनाती है, क्योंकि इससे अलग-अलग वातावरण में इसके भंडारण और उपयोग की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।
रक्षा और अंतरिक्ष कार्यक्रमों में क्यों महत्वपूर्ण है यह तकनीक?
ठोस रॉकेट प्रोपेलेंट आधुनिक रक्षा और अंतरिक्ष प्रणालियों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इनका उपयोग सामरिक मिसाइलों, रॉकेटों, अंतरिक्ष प्रक्षेपण वाहनों और बूस्टर प्रणालियों में किया जाता है।
ठोस प्रोपेलेंट का एक प्रमुख लाभ यह है कि इसे लंबे समय तक संग्रहीत किया जा सकता है और आवश्यकता पड़ने पर तेजी से इस्तेमाल किया जा सकता है। यही कारण है कि सैन्य और अंतरिक्ष प्रक्षेपण प्रणालियों में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
BAM-H24 को भी इसी प्रकार के उच्च-ऊर्जा अनुप्रयोगों के लिए विकसित किया गया है।
उच्च विशिष्ट आवेग और कम इग्निशन डिले
BAM-H24 की एक महत्वपूर्ण विशेषता इसका उच्च विशिष्ट आवेग (Specific Impulse) बताया गया है।
रॉकेट प्रणोदन विज्ञान में विशिष्ट आवेग को ईंधन या प्रोपेलेंट की दक्षता मापने का एक महत्वपूर्ण मानक माना जाता है। सामान्य रूप से उच्च विशिष्ट आवेग का अर्थ बेहतर प्रणोदन दक्षता से जुड़ा होता है।
इसके अलावा, इस सामग्री में कम Ignition Delay Time की विशेषता भी बताई गई है। इसका अर्थ है कि प्रोपेलेंट अपेक्षाकृत कम समय में प्रज्वलित हो सकता है, जो रॉकेट और मिसाइल प्रणोदन प्रणालियों के प्रदर्शन के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।
पेटेंट और शोधकर्ताओं की जानकारी
इस आविष्कार के लिए पेटेंट आवेदन संख्या 202211074244 थी। आवेदन 21 दिसंबर 2022 को दाखिल किया गया था।
इस शोध का श्रेय मुख्य रूप से निम्नलिखित शोधकर्ताओं को दिया गया है—
- डॉ. मुद्दामर्री हनुमंथा राव, ACRHEM
- प्रो. मुरलीधरन कृष्णमूर्ति, ACRHEM और यूनिवर्सिटी ऑफ हैदराबाद के स्कूल ऑफ केमिस्ट्री
भारतीय पेटेंट कार्यालय ने इस तकनीक के लिए पेटेंट संख्या 599900 जारी की है।
भारत की आत्मनिर्भर रक्षा तकनीक को मिलेगा बल
यह उपलब्धि भारत की स्वदेशी उच्च-ऊर्जा सामग्री और प्रोपेलेंट तकनीक के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
रक्षा और अंतरिक्ष कार्यक्रमों के लिए स्वदेशी तकनीकों का विकास भारत की रणनीतिक क्षमता को मजबूत करने के साथ-साथ आयात पर निर्भरता कम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
BAM-H24 जैसे नए ऊर्जा-समृद्ध यौगिकों पर शोध भविष्य में अधिक उन्नत रॉकेट, मिसाइल और प्रक्षेपण प्रणालियों के विकास की संभावनाओं को मजबूत कर सकता है।
खबर से जुड़े महत्वपूर्ण GK तथ्य
- भारतीय पेटेंट कार्यालय देश में पेटेंट प्रदान करने वाली वैधानिक संस्था है।
- यह पेटेंट अधिनियम, 1970 के तहत कार्य करता है।
- ठोस रॉकेट प्रोपेलेंट का उपयोग मिसाइलों, लॉन्च वाहनों और स्पेस बूस्टर में किया जाता है।
- नॉन-हाइग्रोस्कोपिक पदार्थ वातावरण से नमी को कम अवशोषित करते हैं।
- बोरॉन, हाइड्रोजन और नाइट्रोजन उच्च-ऊर्जा रासायनिक यौगिकों के विकास में महत्वपूर्ण तत्व माने जाते हैं।
- विशिष्ट आवेग रॉकेट प्रोपेलेंट की दक्षता मापने का एक महत्वपूर्ण मानक है।





