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संयुक्त राष्ट्र ने 27 नवंबर को बाल विवाह उन्मूलन का अंतरराष्ट्रीय दिवस घोषित किया

On: September 6, 2026
बाल विवाह उन्मूलन दिवस

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 4 सितंबर 2026 को एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित करते हुए प्रत्येक वर्ष 27 नवंबर को बाल, कम उम्र और जबरन विवाह के उन्मूलन का अंतरराष्ट्रीय दिवस मनाने की घोषणा की है।

193 सदस्यीय संयुक्त राष्ट्र महासभा ने इस प्रस्ताव को सर्वसम्मति से अपनाया। इसका उद्देश्य बाल विवाह के खिलाफ वैश्विक स्तर पर जागरूकता बढ़ाना, नीतिगत प्रयासों को मजबूत करना और बच्चों, विशेषकर लड़कियों के अधिकारों की रक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना है।

प्रस्ताव किसने पेश किया

इस प्रस्ताव को सिएरा लियोन की प्रथम महिला डॉ. फातिमा मादा बायो ने आगे बढ़ाया। वह Organization of African First Ladies for Development की अध्यक्ष भी हैं।

बाल विवाह के खिलाफ इस अंतरराष्ट्रीय दिवस की पहल में भारत के बाल अधिकार कार्यकर्ता और Just Rights for Children के संस्थापक भुवन ऋभु की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही।

बाल विवाह क्यों गंभीर समस्या है

बाल विवाह बच्चों के अधिकारों का गंभीर उल्लंघन है। कम उम्र में विवाह होने से बच्चों की शिक्षा प्रभावित होती है और स्वास्थ्य, सुरक्षा तथा भविष्य के अवसरों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

जबरन विवाह में व्यक्ति की स्वतंत्र और पूर्ण सहमति नहीं होती। इसलिए बाल विवाह, कम उम्र में विवाह और जबरन विवाह मानवाधिकार, बाल संरक्षण और लैंगिक समानता से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे हैं।

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह निर्णय

27 नवंबर की तारीख भारत के लिए भी विशेष महत्व रखती है। भारत सरकार ने 27 नवंबर 2024 को बाल विवाह मुक्त भारत अभियान शुरू किया था।

इस अभियान का उद्देश्य बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता बढ़ाना, सामुदायिक भागीदारी को मजबूत करना और बाल विवाह की रोकथाम के लिए प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करना है।

संयुक्त राष्ट्र द्वारा भी 27 नवंबर को इसी विषय से संबंधित अंतरराष्ट्रीय दिवस घोषित किए जाने से भारत के अभियान को वैश्विक स्तर पर अतिरिक्त महत्व मिला है।

वैश्विक स्तर पर बाल विवाह की स्थिति

संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष यानी UNFPA के अनुसार, दुनिया में लगभग 64 करोड़ महिलाएं और लड़कियां ऐसी हैं जिनका विवाह 18 वर्ष की आयु से पहले हो चुका था।

हर वर्ष लगभग 1.2 करोड़ लड़कियों का विवाह 18 वर्ष की आयु से पहले हो जाता है। इससे स्पष्ट होता है कि बाल विवाह आज भी वैश्विक स्तर पर एक गंभीर सामाजिक समस्या है।

भारत में बाल विवाह से संबंधित कानून

  • भारत में बाल विवाह की रोकथाम के लिए प्रमुख कानून बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 है।
  • इस कानून का उद्देश्य बाल विवाह को रोकना तथा इससे जुड़े मामलों में कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करना है।

परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

  • संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 27 नवंबर को बाल, कम उम्र और जबरन विवाह के उन्मूलन का अंतरराष्ट्रीय दिवस घोषित किया है।
  • प्रस्ताव 4 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा पारित किया गया।
  • संयुक्त राष्ट्र महासभा में 193 सदस्य देश हैं।
  • प्रस्ताव को सिएरा लियोन की प्रथम महिला डॉ. फातिमा मादा बायो ने आगे बढ़ाया।
  • भारत में बाल विवाह मुक्त भारत अभियान 27 नवंबर 2024 को शुरू किया गया था।
  • भारत में बाल विवाह की रोकथाम के लिए प्रमुख कानून बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 है।

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